कैसा होगा देस पिया का कैसा पिया का गाँव रे

कैसी होगी धूप वहाँ की कैसी वहाँ की छाँव रे

चाँदी जैसे पेड़ वहाँ के हीरे मोती फूल-ओ-फल
सोने की पीली धरती पर रखते होंगे पाँव रे

पी पी पपीहे बोलते होंगे कानों में रस घोलते होंगे
ठुमरी होगी कोयल की कू कजरी कागा की काओं रे

कान्हा होंगे लोग वहाँ के राधा होंगी बालाएँ
प्यार की बंसी बजती होगी हर समय हर ठाओं रे

लाज से हाए मर जाऊँगी मैं मिट्टी में गड़ जाऊँगी
जब सखियाँ मुझ को छेड़ेंगी ले कर पी का नाँव रे

— Ghaus Siwani

More by Ghaus Siwani

Other ghazal from the same pen

See all from Ghaus Siwani →

Aadmi Shayari

Shers of aadmi.

All Aadmi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling