तुम सेे यारी सीख रहा हूँ
दुनियादारी सीख रहा हूँ
लंबा जीवन आन पड़ा है
ज़िम्मेदारी सीख रहा हूँ
मेरे दुख में किस की है कितनी
भागेदारी सीख रहा हूँ
नफ़रत धोखा इश्क़ मुहब्बत
बारी बारी सीख रहा हूँ
उन की मुझ से रब्त की वजहें
चालें सारी सीख रहा हूँ
— Gaurav Kumar Aarambh















