दिल पर इक आज़ार हुई हैं दो आँखें
कहने को बस चार हुई हैं दो आँखें
देखा है इक बार मगर हर शय में है
शायद कुछ बीमार हुई हैं दो आँखें
नज़रें मिलना और भला क्या बच पाना
सुनते हैं हथियार हुई हैं दो आँखें
सब खोया पर चेहरे की रंगत रोमानी
सजदे की हकदार हुई हैं दो आँखें
अबतक मक़सद एक ये खोजा जीवन का
जीने का आधार हुई हैं दो आँखें
— Gaurav Kumar Aarambh















