टूट चुका हूँ अब मुझ को हल्कान न करबिखरे हुए से उठने का फ़रमान न करपेड़ जो रोपे थे हम ने साए के लिएसूखे दरख़्तों से फल के अरमान न कर— Gaurav Kumar Aarambh