एक बदन इक जान है घर मेंइतना सा सामान है घर मेंआँख मिलाते डर लगता हैहर चेहरा अनजान है घर मेंदफ़्न किए सब ख़्वाब यहीं परअपना क़ब्रिस्तान है घर मेंनगरी नगरी घूमने वालेकोई बहुत हलकान है घर मेंक्यूँ दुनिया की क़ैद में आएँअच्छा सा ज़िंदान है घर मेंजग को समझ न आने वालेतू कितना आसान है घर में— Gourav Kumar