मुझे लगा था उम्र भर का इंतिज़ाम हो गया
तुम्हारा ग़म तो चार दिन में ही तमाम हो गया
नज़र से इश्क़ की परत हटी तो एक पल में ही
वो रंग रूप ढल गए वो शख़्स आम हो गया
तुझे थी इश्क़ से ग़रज़ मुझे ग़ज़ल की भूख थी
तेरा भी काम हो गया मेरा भी काम हो गया
— Gourav Kumar















