Gourav Kumar

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@gourav-kumar

Gourav Kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Gourav Kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Ghazal
सबको हैराँ कर जाऊँगा
वक़्त से पहले मर जाऊँगा

पंछी फ़लक को निकल गए हैं
और मैं फिर दफ़्तर जाऊँगा

दरियाओं का दावा कब है
दो आँखें तो भर जाऊँगा

अगली बार मैं उससे मिलने
ख़ुद को भी ले कर जाऊँगा

ख़ूब हँसूँगा ऊपर ऊपर
अंदर अंदर डर जाऊँगा

इक दिन छुट्टी मिल जाएगी
इक दिन मैं भी घर जाऊँगा

आपको ज़हमत कुछ नइँ होगी
मैं चुपचाप बिखर जाऊँगा
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Gourav Kumar
तेरी क़ामयाबी, मेरी क़ामयाबी बराबर नहीं
यहाँ तक पहुँचने में मेहनत है मेरी मुक़द्दर नहीं

ख़ुदा ने यहाँ कैसे कैसों की झोली में क्या क्या दिया
हमें मौत के वक़्त भी तेरी बाँहें मयस्सर नहीं

उसे अपनी ग़लती का एहसास होता रहा उम्र भर
मैं रुख़्सत हुआ था उसे चूम कर, लड़-झगड़ कर नहीं

उजाला बनाना तो था पर अँधेरा मिटाना न था
नया इश्क़ करना था लेकिन पुराना भुला कर नहीं

ये वहशत के बढ़ने से समझे इसी रोज़ बिछड़े थे हम
वगरना तो सहरा में कोई कैलेंडर-वैलेंडर नहीं

इसी नाम-ओ-सूरत का इक शख़्स इस घर में रहता तो है
मगर ढूँढ़ती हो जिसे तुम वो अरसे से घर पर नहीं
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