इक उम्र से हम तुम आश्ना हैं हम से मह ओ अंजुम आश्ना हैंदिल डूबता जा रहा है पैहमलब हैं कि तबस्सुम आश्ना हैंउन मंज़िलों का सुराग़ कम हैजिन मंज़िलों में गुम आश्ना हैंकुछ चारा-ए-दर्द-ए-आश्नाईकिस सोच में गुम-सुम आश्ना हैंइस दौर में तिश्ना-काम साक़ीहम जैसे कई ख़ुम-आश्ना हैं— Hafeez Hoshiarpuri