nanhi ho tum bacchi ho tum | नन्ही हो तुम बच्ची हो तुम

  - Hafeez Jalandhari

नन्ही हो तुम बच्ची हो तुम
सब अक़्ल की कच्ची हो तुम
आओ मिरी बातें सुनो
चालें सुनो घातें सुनो
उस्ताद की हर बात को
अपनी गिरह में बाँध लो
जब तुम जवाँ हो जाओगी
मछली की माँ हो जाओगी
फिर याद आएँगी तुम्हें
लहरे दिखाएँगी तुम्हें
बातें हमारी मछलिओ
ऐ प्यारी प्यारी मछलिओ
रोहू की बेटी कान धर
सांवल की बच्ची आ इधर
और नन्ही मुन्नी तू भी सुन
ओ थुन मथुन्नी तू भी सुन
चौड़े दहाने वालियो
और दुम हिलाने वालियो
तुम भी सुनो चमकीलियो
ऐ काली नीली पीलियो
तुम को यहाँ पर देख कर
नद्दी पे आ जाए अगर
कोई शिकारी मछलियो
ऐ प्यारी प्यारी मछलियो
जब वो किनारे बैठ कर
डोरी को फेंकेगा इधर
नन्हे से काँटे पर चढ़ा
होगा मज़े का केचुआ
लपकोगी तुम सब बे-ख़बर
इक तर निवाला जान कर
काँटा मगर चुभ जाएगा
बस हल्क़ में खुब जाएगा
तड़पोगी और घबराओगी
लेकिन सभी फँस जाओगी
तुम बारी बारी मछलियो
ऐ प्यारी प्यारी मछलियो
जब केचुआ खा जाओ तुम
बस लौट कर आ जाओ तुम
लेकिन ज़रा सा छेड़ दो
काँटे की पतली डोर को
सरकंडा जब खिंच आएगा
धोका शिकारी खाएगा
समझेगा मछली फँस गई
खींचेगा बंसी डोर की
फिर शक्ल उस की देखना
होती है कैसी देखना
वो बे-क़रारी मछलियो
ऐ प्यारी प्यारी मछलियो
अब वो बहुत झल्लाएगा
चीख़ेगा और चिल्लाएगा
फिर केचवे पर केचुआ
काँटे में भरता जाएगा
तुम भी इसी तरकीब से
खाती ही जाना केचुवे
आख़िर शिकारी हार कर
उठेगा दिल को मार कर
हीला-गरी रह जाएगी
सारी धरी रह जाएगी
थैली पिटारी मछलियो
ऐ प्यारी प्यारी मछलियो

  - Hafeez Jalandhari

Deedar Shayari

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