go ye rakhti nahin insaan ki haalat achchhii | गो ये रखती नहीं इंसान की हालत अच्छी

  - Hafeez Jaunpuri

गो ये रखती नहीं इंसान की हालत अच्छी
फिर भी सौ काम से दुनिया के मोहब्बत अच्छी

क्या वो अच्छा है अगर सिर्फ़ है सूरत अच्छी
सूरत अच्छी जो ख़ुदा दे तो हो सीरत अच्छी

वस्ल में ये जो हूँ बेबाक तो निकले मतलब
ऐसे मौक़े पे हसीनों की शरारत अच्छी

जिस में शोख़ी न शरारत न करिश्मा न अदा
ऐसे मा'शूक़ से मिट्टी की है मूरत अच्छी

दोस्त उन का जो है बरबाद तो दुश्मन है ख़राब
लुत्फ़ अच्छा न हसीनों की अदावत अच्छी

शिकवा वो ख़ूब है जिस से हो लगावट ज़ाहिर
शुक्र का जिस में हो पहलू वो शिकायत अच्छी

न हुई क़द्र मुक़द्दर की बुराई से 'हफ़ीज़'
क्या हुआ आप ने पाई जो तबीअ'त अच्छी

  - Hafeez Jaunpuri

Qismat Shayari

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