paapa apni nanhi poosi kar bai | पापा अपनी नन्ही पूसी कर बैठी हड़ताल सुनो जी

  - Haidar Bayabani

पापा अपनी नन्ही पूसी कर बैठी हड़ताल सुनो जी
चूहों की बन आई घर में आया है भौंचाल सुनो जी
कहती है ये नन्ही पूसी अब चूहे न खाऊँगी मैं
घर वालों से जब तक सारी माँगें न मनवाऊँगी मैं

माँग है पहली सर्दी में हो स्वेटर और रज़ाई भी
माँग है दूजी बंद न रक्खो मक्खन दूध मलाई भी

माँग है तीजी रात किचन में थोड़ा भी न उजाला हो
माँग है चौथी सब कुत्तों का फ़ौरन देश-निकाला हो

  - Haidar Bayabani

Subah Shayari

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