दिल में तुम और मिरे गुमान में हो
तुम ही हर लफ़्ज़ हर बयान में हो
मुझ को यकसर भुला दिया तुम ने
तुम मगर फिर भी मेरे ध्यान में हो
अपने अल्फ़ाज़ इस तरह बरतो
तीर जैसे कोई कमान में हो
उम्र अपनी गुज़ार दूँ उस में
अक्स तेरा ही जिस मकान में हो
तेरा चेहरा मुझी में रहता है
फिर तू चाहे किसी जहान में हो
तुझ से या रब दुआ है बस इतनी
यार मेरा न इम्तिहान में हो
— REHAN KHAN















