बिना उसके कहीं अक्सर न जाएँ हम
पकड़ ले हाथ जो दफ़्तर न जाएँ हम
मिले हैं मुद्दतों में इस दफ़ा उनसे
भला कैसे गले लगकर न जाएँ हम
हमें बस उनकी पेशानी से मतलब है
कभी ख़्वाबों में भी लब पर न जाएँ हम
उन्हें पाने की ख़ातिर जाना पड़ता है
वगरना उस ख़ुदा के दर न जाएँ हम
मोहब्बत इस क़दर की हो गई उनसे
अगर वो मिल गए तो मर न जाएँ हम
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