दिल से मुझे उस को भुलाना है अभी

सो फूल इक प्यारा लगाना है अभी

कुछ ऐसे उस ने तोहफा माना नहीं
ये गिफ़्ट रक्खो घर में जाना है अभी

होता नहीं अब सब्र शब है ये तो क्या
खोलो ये खिड़की मुझ को आना है अभी

बातें छुपाना बंद कर दो हर्ष तुम
इज़हार करने का ज़माना है अभी

हम ही मनाएंगे भी पर पहले तो
इक नाम से उस को जलाना है अभी

— Harsh Raj

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