गुनाहों का मैं देवता हूँ
मुहब्बत मैं जो मुब्तिला हूँ
मुनासिब कहाँ है 'मिलन' ये
किसी और का हो चुका हूँ
तेरा यार कोई नहीं है
मेरे यार में खो गया हूँ
कहीं से कहीं फिरता हूँ में
ज़मीं को ज़मीं कर रहा हूँ
तेरा हाए मुझ को यूँ तकना
भुला बैठा तुझ से ख़फ़ा हूँ
यहाँ कोई मुझ सा नहीं है
मुहब्बत का मैं दायरा हूँ
— Harsh saraswat Arsh















