जल महल और न जलपरी के लिए
हम तो आए हैं तिश्नगी के लिए
कुछ न कर पाए ज़िंदगी में जब
क्यूँ अहम होंगे हम किसी के लिए
कोई तोहफ़े में पा गया जन्नत
कोई मरता रहा ख़ुशी के लिए
जीने लाइक़ न अब बची दुनिया
कोई फ़तवा दे ख़ुद-कुशी के लिए
हम हैं मसरूफ़ अपने कामों में
है नहीं वक़्त आशिक़ी के लिए
हम को बस एक से मोहब्बत है
दिल न धड़केगा हर किसी के लिए
जिस का मिलना बहुत ज़रूरी था
हम तरसते रहे उसी के लिए
ख़त्म हो जाए गर ज़रूरत तो
कोई रुकता नहीं किसी के लिए
हम से अब नौकरी कराओ मत
हम हैं 'हस्साम' शा'इरी के लिए
— Hassam Tajub














