Hukm
Hukm
Ghazal

शे'र सुने या जादू चलता देख लिया

तू ने मुझ में ऐसा भी क्या देख लिया

फिर से खुल के हँसने को जी करता है
फिर से कोई इश्क़ में रोता देख लिया

मैं ने शाल ख़रीदी देख के रंगों को
उस पगली ने महंगा सस्ता देख लिया

कई बरस तो साथ रहे , अब कहते हो
'हुक्म' नहीं है काम का बंदा देख लिया

— Hukm

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