Hukm
Hukm
Ghazal

तुम कहते हो ख़ासा दूर रहे हैं हम

ऐसे तुम से कितना दूर रहे हैं हम?

हम को उस की हालत देख के लगता है
शायद सच में ज़्यादा दूर रहे हैं हम

जब भी मिलेंगे घंटों रोते बैठेंगे
अबकी बारी ऐसा दूर रहे हैं हम

उस की कुर्बत मेरे हाथ नहीं, उस ने
जब जब जैसे चाहा दूर रहे हैं हम

इस रिश्ते की मौत के काफ़ी कारण हैं
लेकिन सब से पहला दूर रहे हैं हम

— Hukm

More by Hukm

Other ghazal from the same pen

See all from Hukm →

Khudkushi Shayari

Shers of khudkushi.

All Khudkushi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling