जो उसे याद कर के लिक्खे हैं
मेरे सारे वो शे'र अच्छे हैं
जब कभी दिल उदास होता है
उस की तस्वीर देख लेते हैं
आज रोने के बा'द सोएँगे
उस की यादों के साथ बैठे हैं
सब मुहब्बत की मेहरबानी है
मेरे सीने में घाव जितने हैं
ये बदलती है हर किसी के दिन
मैं ने क़िस्मत के खेल देखे हैं
जब शराफ़त की बात होती है
लोग मेरी मिसाल देते हैं
नाम वैसे तो मेरा 'सागर' है
पर मुहब्बत भी लोग कहते हैं
— SAAGAR SINGH RAJPUT















