कोई वादा वफ़ा निभाएगा
कोई छोड़ेगा भूल जाएगा
मैं भी देखूँगा कैसे हँसते हो
वक़्त जब तुम को आज़माएगा
मैं इजाज़त अगर नहीं दूँगा
कोई कैसे मुझे रुलाएगा
वो मुझे याद कर के रोएगी
जब कोई उस का दिल दुखाएगा
मैं ज़माने से जीत जाऊँगा
मुझ को अपना कोई हराएगा
खेल अब ख़त्म होने वाला है
क्या गले से कोई लगाएगा
रात काटेगा अपनी रो रो कर
जो मुहब्बत के गीत गाएगा
जब पसीना जबीं से छलकेगा
तेरे चेहरे पे नूर आएगा
इक सवाल अपने आप से पूछो
क्यूँ कोई तुम से दिल लगाएगा
अपना मतलब निकालने के बा'द
कोई रिश्ता नहीं निभाएगा
मैं ने ख़्वाबों में भी नहीं सोचा
वक़्त ऐसे भी दिन दिखाएगा
कुछ तो करना पड़ेगा 'सागर' अब
उम्र भर कौन ख़र्च उठाएगा















