नाम बे-शक ही मेरा छुपाया करो
अपने हाथों में मेहँदी लगाया करो
वक़्त की धूप जानाँ बहुत तेज़ है
अपनी ज़ुल्फ़ों का तुम मुझ पे साया करो
इक दफ़ा आज फिर तुम से कहता हूँ मैं
जान छोटी सी बिन्दी लगाया करो
बद-नज़र से भी तुम को बचाएगा ये
अपनी आँखों में काजल लगाया करो
लोग अच्छे नहीं हैं ज़माने के अब
हर किसी से न आँखें मिलाया करो
अच्छा लगता नहीं है मुझे जान-ए-जाँ
सब के आगे न तुम मुस्कुराया करो
ऐसी नज़रों से ग़ैरों को तुम देख कर
हर घड़ी दिल न मेरा जलाया करो
मैं हूँ तारीफ़ करने को ज़िंदा अभी
यूँ न सब को अदाएँ दिखाया करो
याद मुझ को करो ये ज़रूरी नहीं
अपने बारे में लेकिन बताया करो
नींद आती नहीं है मुझे रात भर
इतना ज़्यादा भी मत याद आया करो
मैं ने ग़ज़लें लिखी हैं तुम्हें देख कर
इन को अपनी समझ कर के गाया करो
मैं हूँ 'सागर' तुम्हारा तो हक़ है तुम्हें
राज़ की बात मुझ को बताया करो















