याद आई वो लड़की बड़ी रात भर
आँसुओं की लगी थी झड़ी रात भर
उस की तस्वीर पर मैं ने ग़ुस्सा किया
उस की तस्वीर मुझ से लड़ी रात भर
कल की शब इश्क़ आया था मिल ने मुझे
मैं ने डर से न खोली कड़ी रात भर
इश्क़ के रोग की अब दवा चाहिए
इसलिए ढूँढ़ता हूँ छड़ी रात भर
मैं ने माशूक़ को बे-वफ़ा कह दिया
डाँट 'सागर' से मुझ को पड़ी रात भर
— SAAGAR SINGH RAJPUT















