
नज़ारों में तुम्हीं तुम हो तुम्हीं तुम हो बहारों में
ज़मीं में भी तुम्हीं तुम हो तुम्हीं हो चाँद तारों में
हज़ारों चाँद से ज़्यादा क़सम से ख़ूब-सूरत हो
तुम्हीं को है कहा मैं ने कहा है बस इशारों में
— SAAGAR SINGH RAJPUT
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