तुम से फु़र्सत मिले तब तो सोचा करें
क्या नहीं हम करें और क्या क्या करें
है हमारे ख़यालों में दो काम ही
तुम को देखा करें और देखा करें
चाय पीते हुए तेरी आँखें पढ़ें
और फिर तेरी आँखों पे चर्चा करें
तू ने अच्छा किया जो सहारा दिया
पर ज़रूरी नहीं हम भी अच्छा करें
हाँ मोहब्बत है दोनों तरफ़ से मगर
आप को चाहिए हम से पर्दा करें
मेरी ख़्वाहिश है जब आप अफ़ज़ल मिलें
फूल हर मर्तबा साथ लाया करें
— S M Afzal Imam















