एक ही कमी है बसज़िंदगी यही है बसहै वो अजनबी लेकिनजुस्तुजू वही है बसकौन है ख़ुदा जानेयाद हर घड़ी है बसछोटी है ख़ुशी वैसेजेब से बड़ी है बसहोंठ पर तबस्सुम हैआँख में नमी है बसख़ैर हो शब-ए-ग़म कीशाम ही ढली है बस— Javed Aslam