एक ही कमी है बस
ज़िंदगी यही है बस
है वो अजनबी लेकिन
जुस्तुजू वही है बस
कौन है ख़ुदा जाने
याद हर घड़ी है बस
छोटी है ख़ुशी वैसे
जेब से बड़ी है बस
होंठ पर तबस्सुम है
आँख में नमी है बस
ख़ैर हो शब-ए-ग़म की
शाम ही ढली है बस
— Javed Aslam
ज़िंदगी यही है बस
है वो अजनबी लेकिन
जुस्तुजू वही है बस
कौन है ख़ुदा जाने
याद हर घड़ी है बस
छोटी है ख़ुशी वैसे
जेब से बड़ी है बस
होंठ पर तबस्सुम है
आँख में नमी है बस
ख़ैर हो शब-ए-ग़म की
शाम ही ढली है बस
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