पाँव में जब ये आबले आए
सर उठाने के हौसले आए
काविशें हम कभी न छोड़ेंगे
हाथ कुछ भी नहीं भले आए
इश्क़ तो एक से ही होता है
तुम अना भी लिए चले आए
मौत हो या हयात डर कैसा
जिस को मिलना है वो मिले आए
चल पड़ा जब तो मंज़िलें आईं
सिर्फ़ सोचा तो मसअले आए
— Javed Aslam















