हम कमरे में तो जी भर के रोते हैं
पर हमने दरवाज़े हँसकर खोले हैं
मेरा अच्छा वक़्त नहीं आने वाला
मुझ सेे कल घड़ियों के काँटे बोले हैं
हम उनके बहकावे में आ जाते हैं
क्या सच में यारा हम इतने भोले हैं
कैसे कर लूँ आज भरोसा मैं तेरा
तुमने तो सीने में ख़ंजर घोंपे हैं
उसको कहना और नहीं रो सकता मैं
यार मिरे घर में दो बच्चे छोटे हैं
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