जानते हो कि तुम ज़िन्दगी हो मेरीतुम ग़ज़ल गीत और शा'इरी हो मेरीवक़्त रहते उठा लीजिए फोन कोक्या पता कॉल ये आख़िरी हो मेरी— Jitendra "jeet"