सिर्फ़ हमारा शहर ही नहीं जला
जल गई हमारी रेशमी तहज़ीब भी
अब इन ही चिंगारियों से
रह रह कर सुलग उठती है
कोमल मन में
नफ़रत की ज्वाला
— Kahkashan Tabassum
जल गई हमारी रेशमी तहज़ीब भी
अब इन ही चिंगारियों से
रह रह कर सुलग उठती है
कोमल मन में
नफ़रत की ज्वाला
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