किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे

ये माना चाँद अभी इक रेत का मैदान है लेकिन
किसी दिन जा के हम इस को हसीं जन्नत बनाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे
ये माना चाँद पर इस वक़्त आबादी नहीं लेकिन
किसी दिन हम वहाँ जा कर नई बस्ती बसाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे
ये माना चाँद अभी बद-सूरत-ओ-बद-शक्ल है लेकिन
किसी दिन हम उसे दुनिया से भी दिलकश बनाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे
ये माना चाँद पर हर सम्त हैं ज्वाला-मुखी लेकिन
किसी दिन हम वहाँ पर प्यार की कलियाँ खिलाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे
ये माना चाँद अंदर से बहुत तारीक है लेकिन
किसी दिन हम वहाँ पर अम्न की शमएँ जलाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे
ये माना चाँद पर हर सम्त हैं वीरानियाँ लेकिन
किसी दिन हम वहाँ जा कर बहुत धू
में मचाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे
ये माना चाँद पर जाना अभी बे-कार है लेकिन
वो दिन भी आएगा जब हम वहाँ पिकनिक मनाएँगे
किसी दिन चाँद पर हम लोग भी रॉकेट से जाएँगे

— Kaif Ahmad Siddiqui

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