नज़्म:- खुली आँखों वाले सपने
क्या तुम ने खुली आँखों वाले सपने देखे हैं
वो सपने जो सोने नहीं देते
तो दौड़ो न उन के पीछे जान लगा दो
उन को पूरा करने में
हाँ शुरू में डर लगेगा चलोगे गिरोगे
उठोगे फिर दौड़ लगाओगे
नाकामयाब होगे फिर कोशिश करोगे अपने छूटेंगे
घर छूटेगा तड़पोगे रोओगे
चोट लगेगी दिल टूटेगा कोसे जाओगे
मारे जाओगे सब हँसेंगे
कम से कम ये मलाल तो नहीं होगा कि
एक बार कोशिश भी नहीं की
और वो कामयाबी कुछ और ही होगी
— Akram Kolkatvi















