दिन गिन के कटा साल है मेरा तिरे पीछे
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तिरे पीछे
उठता है जिगर से जो धुआँ होने को हूँ राख़
कम ख़ाक से दर-हाल है मेरा तिरे पीछे
जीने को जिए जाता हूँ मैं बन के सुख़नवर
ग़ज़लों में छिपा हाल है मेरा तिरे पीछे
इतनी है दुआ पूछे ज़माना तुझे ये बात
दीवानों सा क्यूँ हाल है मेरा तिरे पीछे
— Karal 'Maahi'















