कौन देता है सदा हम को घने जंगल मेंतू है या तेरा तसव्वुर है भरे जंगल मेंकोई मंज़िल है न रास्ता है न साया कोईमैं अकेला ही भटकता हूँ मेरे जंगल में— Karan Sahar