गुलशन में तितलियों के रवय्ये की सोचना
औरत से जब भी हाथ मिलाने की सोचना
मुझ को ये किस मक़ाम पे ले आया दोस्तो
हर बार दो क़दम मिरा आगे की सोचना
कमज़र्फ आदमी की ये भी तो निशानी है
मुश्किल घड़ी में हाथ छुड़ाने की सोचना
ऑफिस के भाग-दौड़ से फ़ुर्सत निकाल कर
इस साल अपने गाँव में आने की सोचना
दौलत कमाने आते हैं शहरों में सब-के-सब
लेकिन तुम्हारा नाम कमाने की सोचना
हैं लाख ज़िंदगी में परेशानियाँ मगर
मरने का फ़ैसला तू बदलने की सोचना
हम को भी ले के जाएगा बर्बादियों की ओर
इक दूसरे पे तीर चलाने की सोचना
— Kartik Bhalerao















