तेरी गली से जनाज़ा गुज़रने वाला है
वो तेरी याद में घुट कर ही मरने वाला है
गुनाहगार है दिल का सज़ा के क़ाबिल है
वो बे-वफ़ा जो ज़बाँ से मुकरने वाला है
कुछ इस तरह से दिखाया है ज़ख़्म-ए-दिल उस को
मिलाते हाथ मोहब्बत से डरने वाला है
ख़ुमार ऐसा चढ़ा है तेरे दिवाने को
सुना है अब के तमाशा ही करने वाला है
नसीब ऐसा सजाया है मैं ने सर अपने
ये झुक गया तो मुक़द्दर बिखरने वाला है
हज़ार ऐब छुपाता है अपने चेहरे के
वो आइने की नज़र से उतरने वाला है
कुछ ऐसी धूल पड़ी थी वफ़ा की मूरत पर
धुला है अब के सरापा निखरने वाला है
— Kartik Bhalerao















