शोहरत की बुलंदी पे वो इतराने लगे हैंलहजा भी ज़रा तल्ख़ वो अपनाने लगे हैंकल जिन के बुरे वक़्त में हम साथ खड़े थेपहचानने से आज वो कतराने लगे हैं— Kartik Bhalerao