mohabbat ki to koi had koi sarhad nahin hoti | मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती

  - Khalid Moin

मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए

  - Khalid Moin

Democracy Shayari

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    मैं भी तुझ को क्या समझा था

    हाथ छुड़ा कर जाने वाले
    मैं तुझ को अपना समझा था

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    मैं तुझ को अपना समझा था
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