तुम ने बिकना है तो ब्योपार भी हो सकता है
चाहने वाला ख़रीदार भी हो सकता है
अपने दुश्मन को अभी शक की निगाहों से न देख
तेरा क़ातिल तो तेरा यार भी हो सकता है
इश्क़ सूली है तो मरने की रिवायत कैसी
प्यार ज़िंदा तो सर-ए-दार भी हो सकता है
उस के मंज़ूर-ए-नज़र कौन है मालूम नहीं
मुझ सा कम-बख़्त गुनहगार भी हो सकता है
मुझ से दामन न छुड़ा मुझ को बचा कर रख ले
मुझ से इक रोज़ तुझे प्यार भी हो सकता है
— Khalil Ur Rehman Qamar















