जब हम मुट्ठी खोलेंगेनई कहानी खोलेंगेज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैंदेर से पट्टी खोलेंगेचेहरा पढ़ने वाले चोरगठरी थोड़ी खोलेंगेदिल का वहम निकालेंगेगले की डोरी खोलेंगेवो ख़ुद थोड़ी आएगानौकर कुंडी खोलेंगेज़ोर से गाँठ लगाई थीदाँत से रस्सी खोलेंगे— Khurram Afaq