अब न होनी है बात सो जा तू

कोई है उस के साथ सो जा तू

याद कर बे-वफ़ाई वाला दिन
और भुला दे ये रात सो जा तू

देख पंखा है और रस्सी भी
टाल दे हादसात सो जा तू

नींद और ख़्वाब को सँजोकर रख
हैं यही ज़ेवरात सो जा तू

ख़त पुराने वो ख़त नहीं हैं अब
फाड़ दे काग़ज़ात सो जा तू

कुछ नहीं लिखता सिर्फ़ रोता है
रख क़लम और दवात सो जा तू

तीर की वापसी है नामुमकिन
देखनी क्या बरात सो जा तू

चोर को चोर से दे टकराने
होने दे वारदात सो जा तू

तेरे हाथों में कुछ नहीं आना
मौत हो या हयात सो जा तू

फिर मुहब्बत नहीं नहीं भाई
याद कर तजरबात सो जा तू

नोट हों तो चमार लाला क्या
फिर कहाँ जात पात सो जा तू

बाप के जूते भरने हैं ना बस
मार दे ख़्वाहिशात सो जा तू

अक़्ल की बात अब बताता हूँ
आएँ जब मुश्किलात सो जा तू

— Kinshu Sinha

More by Kinshu Sinha

Other ghazal from the same pen

See all from Kinshu Sinha →

Heart Touching Father Shayari

Shers of heart touching father.

All Heart Touching Father Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling