अब सुखन का ग़ुलाम होना है
इस तरह इंतिक़ाम होना है
पग ज़मीं पर हों सर गगन पर हो
ऐसा मेरा मक़ाम होना है
हिज्र तेरे लिए है बदनामी
मेरा तो सिर्फ़ नाम होना है
हाँ मेरे कुछ रक़ीब भी तो हैं
उन का भी इंतिज़ाम होना है
जानता हूँ ये सब बहाने हैं
तुझ को तो बेलगाम होना है
दर्द की बारिशें भी लेनी हैं
कुछ मकानों का बाम होना है
हम अनादार लोग हैं साहब
इश्क़ हम को हराम होना है
— Kinshu Sinha















