tu kare saamne dua haq men | तू करे सामने दु'आ हक़ में

  - Kinshu Sinha

तू करे सामने दु'आ हक़ में
दे यही झूठ इक ख़ुदा हक़ में

कुछ नहीं माँगता कभी भी मैं
देख कुछ भी नहीं मिला हक़ में
इश्क़ करने लगा बड़े हक़ से
फिर मेरा हक़ नहीं रहा हक़ में

बे-वफ़ा कह न पाया मैं तुझको
बच गया इक यही गिला हक़ में

बाल कैसे बिखर गए मेरे
क्या बही थी वही हवा हक़ में

यार के साथ बात यारी की
और सिगरेट आ गिरा हक़ में

नज़रों से चूर कर दिए तारे
चाँद ऐसे नहीं गिरा हक़ में

  - Kinshu Sinha

Rahbar Shayari

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