saanche men ham ne aur ke dhalne nahin diya | साँचे में हम ने और के ढलने नहीं दिया

  - Kunwar Bechain

साँचे में हम ने और के ढलने नहीं दिया
दिल मोम का था फिर भी पिघलने नहीं दिया

हाथों की ओट दे के जला लीं हथेलियाँ
ऐ शम्अ' तुझ को हम ने मचलने नहीं दिया

दुनिया ने बहुत चाहा कि दिल जानवर बने
मैं ने ही उस को जिस्म बदलने नहीं दिया

ज़िद ये थी वो जलेगा तुम्हारे ही हाथ से
उस ज़िद ने एक चराग़ को जलने नहीं दिया

चेहरे को आज तक भी तेरा इंतिज़ार है
हम ने गुलाल और को मलने नहीं दिया

बाहर की ठोकरों से तो बच कर निकल गए
पाँव को अपनी मोच ने चलने नहीं दिया

  - Kunwar Bechain

Shama Shayari

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