"सफ़र"
एक सफ़र जहाँ थम के मैं निकल न सका
एक गली जो तेरा इंतिज़ार करती है
कभी कुछ बात घण्टो तलक कही तुम से
वहीं एक बात जो लबों पे घुट के मरती है
मैं तुम से बात करूँं और मुस्कुराओ तुम
यही कहना है कि इक बार ठहर जाओ तुम
— Kuwar Prateek Singh
एक सफ़र जहाँ थम के मैं निकल न सका
एक गली जो तेरा इंतिज़ार करती है
कभी कुछ बात घण्टो तलक कही तुम से
वहीं एक बात जो लबों पे घुट के मरती है
मैं तुम से बात करूँं और मुस्कुराओ तुम
यही कहना है कि इक बार ठहर जाओ तुम
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