vo jang usii waqt pe ham haar ga.e hain | वो जंग उसी वक़्त पे हम हार गए हैं

  - Kushal Dauneria

वो जंग उसी वक़्त पे हम हार गए हैं
जिस वक़्त पे लड़ते हुए वो बाल खुले हैं

हर कोई डबल रोल अदा कर रहा है दोस्त
ये कैसे मिरी फ़िल्म के किरदार चुने हैं

पंद्रह मिनट को भी भुलाया नहीं जाता
जिस शख़्स को पच्चीस बरस बीत चुके हैं

कोई मिरे अश'आर पे यूँँ रो के गया है
सहरा पे लिखी नज़्म में तालाब मिले हैं

इतनी तो मेरी जाँ तेरी क़ीमत भी नहीं थी
ये जितने बड़े तुझपे मेरे दाँव लगे हैं

  - Kushal Dauneria

Inquilab Shayari

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