अँधेरी राह ने दुनिया की मुझ को मोड़ डाला है
सफ़र में ख़ुद को ही मैं ने कहीं पे छोड़ डाला है
ज़बाँ पर आ गई हर बात जो मन में दबाई थी
मेरे इस दिल की ख़ामोशी ने मुझ को तोड़ डाला है
दिखेंगी कश्तियाँ लेकिन किनारों पर खड़ी होंगी
किसी ने पुल को दरिया पार तक जो जोड़ डाला है
जहाँ पर फूल बिखरे हैं वहीं पर टेकना माथा
कहीं मस्जिद कहीं मन्दिर किसी ने फोड़ डाला है
— Kushal "PARINDA"















