आसमाँ तो है हौसले के लिए
पर ये पिंजरा तराशने के लिए
मुस्कुराहट बस इक दिखावा है
अश्क रक्खे हैं सोचने के लिए
आज की नस्ल को पता ही नहीं
डाँट होती है सीखने के लिए
रात भर जागते रहे दोनों
हालत-ए-हाल पूछने के लिए
मुस्कुराहट उदास चेहरों के
काम आती है मश्वरे के लिए
जीतना तो ख़ुशी है पल भर की
हार होती है तजरबे के लिए
— Harsh Kumar Bhatnagar















