नींद ज़रूरी है कोई ख़्वाब देखने के लिएवो छत पे आई है महताब देखने के लिएकोई समझाये उसे की वो कोई हक़ीम नहींवो ज़िद कर रही है मेरा अज़ाब देखने के लिए— MANOBAL GIRI