burii baat ka kyun na inkaar karna | बुरी बात का क्यूँँ न इनकार करना

  - Manohar Shimpi

बुरी बात का क्यूँँ न इनकार करना
हमेशा सदाक़त का इक़रार करना

खुले आसमाँ में करे जो मुहब्बत
सभी काश कहते उसे प्यार करना

ज़माने मिसालें किसे अब पता हैं
ज़माने की रंगत का इक़रार करना

हिफ़ाज़त भरी वो नज़र और ही है
पता है निगाहों से रुख़्सार करना

बग़ावत अदावत करे जो हमेशा
उसे ख़ूब आता है तलवार करना

बहारें नज़ारे बहारें नज़ारे
कभी हम-नशीं का ही दीदार करना

बयाँ जो किया है किसी ने ग़लत तो
उसी बात का फिर तिरस्कार करना

निगाहें जुबाँ की समझ है 'मनोहर'
किसी अजनबी से न तकरार करना

  - Manohar Shimpi

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