थम गया वक़्त तमाशा नहीं होने वाला
गाँव वीरान हुआ कौन है रोने वाला
इस क़दर कोई क़रीबी मेरा उलझा जैसे
ख़ुद-ब-ख़ुद भूल गया कौन है खोने वाला
इश्क़ परवान चढ़ा ख़ूब गुलों सा लेकिन
हम सेफ़र और कोई था मेरा होने वाला
बात हर बार ही बेमेल अगर हो जानम
इस क़दर इश्क़ समझ लो नहीं होने वाला
अर्श से फ़र्श पे अश'आर 'मनोहर' लिखना
फिर कहो नज़्म ग़ज़ल हर्फ़ पिरोने वाला
— Manohar Shimpi















